Monday, 15 April 2013

घोर घमण्ड जिन्हें


जो धन या पदहीन रहा उसको...... जन त्रस्त किया करते हैं
हा! अपमान कुव्यंजन का नित सज्जन स्वाद लिया करते हैं
ज्ञान न पूजित है गुणवान....... उपेक्षित व्यर्थ जिया करते हैं
देख विसंगति घोर घमण्ड जिन्हें..... सब मान दिया करते हैं
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

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