Friday, 12 April 2013

माँ शारदा के श्री चरणों में समर्पित एक घनाक्षरी छंद------


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शक्ति भक्ति मुक्ति पथ की प्रदायिनी हो अम्ब
करुणा की मूर्ति नित्य ममता लुटाती हो
संकट में पड़े हुए भक्त की पुकार सुन
उसी क्षण वीणापाणि दौड़ी चली आती हो
धर्म के विनाश हेतु असुर बढे जो कोई
बन रणचण्डिका अनल बरसाती हो
हंस वाहिनी का रूप त्याग कर अम्ब तुम्ही
धारती हो शस्त्र सिंह वाहन बनाती हो

कृतिकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
कवी,ज्योतिषाचार्य, साहित्याचार्य, धर्मरत्न, पी-एच.डी.
लखनऊ

11 comments:

  1. jay ho maa
    संकट में पड़े हुए भक्त की पुकार सुन
    उसी क्षण वीणापाणि दौड़ी चली आती हो
    धर्म के विनाश हेतु असुर बढे जो कोई
    बन रणचण्डिका अनल बरसाती हो

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (14-04-2013) के चर्चा मंच 1214 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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    1. arun ji abhaar vilamb se dekhne hetu kshmaa praarthee hoon

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  3. बेहतरीन प्रस्तुति.
    पधारें "आँसुओं के मोती"

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  4. आदरनीय सुन्दर प्रस्तुति ...
    http://malikparveen.blogspot.in/ पधारें समय मिले तो ...
    धन्यवाद..

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